संदेश
युवा हूँ मैं - कविता - रामानंद पारीक
नई सोच की उड़ान हूँ मैं संस्कारों का मान हूँ, दो पीढ़ी को साध सके जो मैं ऐसी पहचान हूँ। अदम्य सा उत्साह हूँ मैं श्रेष्ठता की राह हूँ, …
छोटा-सा कोना - कविता - वैष्णवी पाण्डेय
घर में एक छोटा-सा कोना है जो मेरा है जब कभी आशंका और निराशा से मन आतंकित हो उठाता है जब कभी पाती हूँ ख़ुद को खड़ा सवालों के घेरे में …
यही बुद्ध हैं - कविता - सुरेन्द्र प्रजापति
एक शब्द जो बड़ी क्रूरता से उछाला गया घृणा की आग पर तपाया गया उड़ाया गया उपहास तीखे वचनों से दूरदुराया गया "दुर हटो! दुर हटो!!"…
साहित्य - दोहा छंद - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज' | साहित्य पर दोहे
साहित्य मन का दीप है, तम को करता दूर। अक्षर-अक्षर में बसे, जीवन के दस्तूर॥ पीड़ा की भाषा बने, आँसू का अनुवाद। साहित्य दर्पण जगत, जागे…
दोस्त - कविता - विभा
बचपन जिसके संग जिया, पर खिलौना न अपना साझा किया। जिसके बिन न खेल पाए, संगी, साथी, हमजोली— वही तो दोस्त कहलाए। जीवन का हर पाठ पढ़ा, तुझ…
श्री महाकाल तांडव स्तुति - संस्कृत काव्य - बाल कृष्ण मिश्रा
सदाशिव शंकर महेश्वर महेश, परमेश्वर त्रिलोचन त्रयंबक त्रिनेत्र। ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, भव-भय हरन भोलेनाथ, जय जय शिव शंकराय॥ प्रचंड-त…
न आदि न अंत - कविता - प्रवीन 'पथिक'
हर रोज़ एक वही विचार आता है मेरे मन में; उसी रंगीन चिड़िया की भाँति जो मेरे नीम के पेड़ पर लगे घोंसले में चुपके से आती है। और चहचहाते ह…
विश्व गुरु: भारत - कविता - देवेंद्र मणि पाण्डेय
मेरे भारत वासियों, इस जग को फिर से राह दिखाओ। ज्ञान–योग और पराक्रम से, भारत माता का मान बढ़ाओ। जहाँ वेदों की वाणी गूँजे, उपनिषदों का …
एक बात - कविता - डॉ॰ विजय पंडित
एक बात है जो साझा करनी है आपसे... लेकिन मिलने पर दो दिन... दो दिल... कुछ अल्फ़ाज़ और कुछ अहसास वक्त मिले तो ज़रूर बताना कोई भी बहाना न बन…
पाप की कमाई - गीत - महेश कुमार हरियाणवी | निरंकार भजन
नफ़रत का बनकर व्यापारी क्यों पाप की करे कमाई। अनमोल है क़ीमत साँसों की जो व्यर्थ ही रोज़ गँवाई॥ ना दान दिया ना मान किया मूर्खता पर अभिमान…
मनचाहा किसको मिला - दोहा छंद - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
मनचाहा किसको मिला, क्यों करता है क्रोध। ईश कृपा जो कुछ मिला, करो तोष नव शोध॥ मनचाहा किसको मिला, चाहत समझ अनंत। मत भटको लालच कुपथ, चाह …
थोड़ी-सी रोशनी - कविता - अमित राज श्रीवास्तव 'अर्श'
पलकों पर ठहरी नमी अब शब्द नहीं खोजती, बस रिसती है अनकहे अपराध-भाव की तरह। भीतर का शोर इतना भारी हो गया है कि मौन भी टूटकर गिरता है चूर…
अधूरी कविताएँ - कविता - प्रवीन 'पथिक'
आख़िरी साँसों तक पूर्ण नहीं होता जीवन का उपन्यास। कुछ शेष रह जाती हैं, प्रेम कविताएँ; छंद नहीं बनते उस क्षण के, टूट जाती हैं महत्वाकांक…
मैं बेचारा तन्हा अकेला - कविता - बाल कृष्ण मिश्रा
मैं बेचारा तन्हा अकेला भीगी राहों पर ढूँढ़ रहा, ख़ुद को, कहीं। सड़कें भीगीं, शहर धुँधला, आसमान में घना कोहरा। भीगे आँखों से छलके यादों क…
धर्म बनाम कर्म : विचार और क्रियान्वयन
विचारों का उद्गम हमेशा किसी बड़े अवसर से नहीं होता, कई बार किसी क्षणिक प्रश्न से ही विचारों की एक नई यात्रा प्रारंभ हो जाती है-अनायास,…
जो कब की कट गई - नज़्म - छगन सिंह जेरठी
हम दोनों अपनी अपनी पतंग उड़ाते, आसमान में लड़ गए। ना कटती बने ना उड़ती बने, फिर कुछ यूँ उलझ गए। दर्शक जो कह रहे थे, आख़िर वही हुआ उसकी …
अनुभूति और अभिव्यक्ति - कविता - द्रौपदी साहू
बाबूजी! ये घर, जो घर लगता था अब कितना सूना है! आपकी याद में जब गहन चिंतन में डूब जाती हूँ तब मन में प्रश्न उठता है! आख़िर जीवात्मा जाते…
इक देवी ने इस दिल को देवालय कर डाला - कविता - धीरेन्द्र पांचाल
मैंने अपनी जान हथेली पर उसके कर डाला इक देवी ने इस दिल को देवालय कर डाला काश की मिल पाता मैं उनसे हाल दिलों के गाता काश की इस बंजर धर…
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