संदेश
जो मुझको हो रहा है उसका चौथाई ही लिक्खा है - ग़ज़ल - प्रशान्त 'अरहत'
तक़ती : 1222 1222 1222 1222 जो मुझको हो रहा है उसका चौथाई ही लिक्खा है, सबब इस दर्द का हमने तो तन्हाई ही लिक्खा है। पिता के बाद हक़ …
मनुष्य होना - कविता - सुरेन्द्र कल्याण बुटाना
मनुष्य होना केवल दो पैरों पर चलना नहीं है, न ही ऊँची इमारतें बनाना, समुद्रों को मापना या आकाश को छू लेना। मनुष्य होना एक भावना है, एक …
जो ज़ाहिर-ओ-बातिन से ही बेयाद दिखा है - ग़ज़ल - सोनू यादव
अरकान : मफ़ऊल मुफ़ाईलु मुफ़ाईलु फ़ऊलुन तक़ती : 221 1221 1221 122 जो ज़ाहिर-ओ-बातिन से ही बेयाद दिखा है, वह शख़्स ज़माने में यूँ आज़ाद …
किन्तु इस क्षण मौन है - कविता - राघवेंद्र सिंह
प्रिये! नियति फिर से मुझे ये, शून्य करने जा रही है... प्रिये! नियति फिर से मुझे ये, शून्य करने जा रही है। शेष है न कोई आशा, यह मुझे सम…
ऐसी करनी कीजिए - दोहा छंद - डॉ॰ राम कुमार झा 'निकुंज'
ऐसी करनी कीजिए, ख़ुद पर होगी नाज़। गौरवमय पौरुष बने, मिले सफलता ताज़।। ऐसी करनी कीजिए, दे सम्मान समाज। शोभाधायक चहुँ दिशा, नव जीवन आग़ा…
अनकही - कविता - राहुलदेव गौतम
मैंने जाना कि दो लोगों के बीच कोई भी चीज़ हमेशा नहीं रहती सिवाय इस बात के, कि हमारे बीच बहुत कुछ था। मैंने यह भी जाना कि बहुत कुछ, कु…
रोना क्या? - कविता - प्रमोद कुमार
सीखो तुम प्रारब्ध झेलना, चुनौतियों से लड़ना सीखो। हँस कर झेलो दुर्गम दुर्दिन, बाधा पार कर बढ़ना सीखो। बिन संघर्ष के जीवन कैसा, विचलि…
सहनशील धरा - कविता - प्रणव राज
पीड़ा को सहने वाली, बदले में सुंदरता देने वाली, आपदा के वक्त अशांत हो जाती है, फिर से हरियाली देने वाली, स्वयं आहत होने पर भी, नवजीवन …
दिवाली विशेष रचनाएँ: कविता, गीत, दोहे और मुक्तक का सुंदर संकलन | Diwali Poetry
दीपावली केवल दीपों का पर्व नहीं, बल्कि अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का उत्सव है। यह पर्व हमें भीतर और बाहर के अंधेरों को दूर कर प्रेम,…
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विशेष रचनाएँ
दीपावली विशेष रचनाएँ: कविता, गीत, दोहे और मुक्तक का सुंदर संकलन
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