ये रात की तन्हाइयां ।
ये दर्द की दुश्वारियां ,
हर तरफ फैली हुई ,
ये प्यार की रुसवाइयां ।
हर तरफ बजने लगी अब
याद की शहनाइयां।
ये रूह की बेचैनियां ,
दीदार की बेताबियाँ
हैं मुझे आवाज देती ,
ये यार की बेबाकियां ,।
हर तरफ बजने लगी अब
याद की शहनाइयां ।
तड़पा रही मायूसियां ,
दिलदार की खामोशियाँ
जान ले लेंगी मेरी ये
इकरार की नादानियां ।
हर तरफ बजने लगी अब
याद की शहनाइयां ।
सुषमा दीक्षित शुक्ला