हर क़दम देख भाल कर रखना - ग़ज़ल - अब्दुल जब्बार "शारिब"
गुरुवार, जुलाई 30, 2020
मुख़्तसर से भी मुख़्तसर रखना
ज़ेहन में ख़्वाहिशें अगर रखना।
लाख हालात न मुआफ़िक हों,
खुद को दुनिया से जोड़ कर रखना।
आग से हाथ सेंक लेना मगर,
आग हरगिज़ न हाथ पर रखना।
उसको दे सकती है हवा नुकसान,
फ़ूल के पास मत शरर रखना।
आसमां पर तुम्हारे पांव सही,
अपनी नज़रें ज़मीन पर रखना।
मैं समझता हूँ कितना मुशकिल है,
खुद को अपनों में मोतबर रखना।
इश्क़ के रास्ते में ऐ 'शारिब',
हर क़दम देख भाल कर रखना।
अब्दुल जब्बार "शारिब" - झाँसी (उत्तरप्रदेश)
ज़ेहन में ख़्वाहिशें अगर रखना।
लाख हालात न मुआफ़िक हों,
खुद को दुनिया से जोड़ कर रखना।
आग से हाथ सेंक लेना मगर,
आग हरगिज़ न हाथ पर रखना।
उसको दे सकती है हवा नुकसान,
फ़ूल के पास मत शरर रखना।
आसमां पर तुम्हारे पांव सही,
अपनी नज़रें ज़मीन पर रखना।
मैं समझता हूँ कितना मुशकिल है,
खुद को अपनों में मोतबर रखना।
इश्क़ के रास्ते में ऐ 'शारिब',
हर क़दम देख भाल कर रखना।
अब्दुल जब्बार "शारिब" - झाँसी (उत्तरप्रदेश)
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