अंकित राज - मुजफ्फरपुर (बिहार)
कौन रहता हैं दूसरा मुझमें - ग़ज़ल - अंकित राज
बुधवार, सितंबर 23, 2020
मेरे होने का दे पता मुझमें।
कौन रहता है दूसरा मुझमें।
सोचता हूँ कहां से निकलेगा,
तुझको पाने का रास्ता मुझमें।
नींद मुझको तो आ गई लेकिन,
रह गया कौन जागता मुझमें।
उसने झांका तो यूं लगा मुझको,
जैसे उसका है आईंना मुझमें।
खुद से मिलना मुहाल है मेरा,
खुद से कैसा है फासला मुझमें।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर