ममता शर्मा "अंचल" - अलवर (राजस्थान)
खुशियाँ हों या ग़म - ग़ज़ल - ममता शर्मा "अंचल"
गुरुवार, अक्टूबर 22, 2020
मैं तुममें, तुम मुझमें प्रियतम
इक दूजे को क्यों ढूँढें हम
रोज़ मिलेंगे उसी तरह हम
पंखुड़ियों से जैसे शबनम
हम -तुम आपस में बाँटेंगे
दामन में खुशियाँ हों या गम
दिल से दिल की बातें होंगी
वक़्त मिले चाहे जितना कम
हम-तुम दोनों यूँ हो जाएँ
एक ज़ख़्म हो और इक मरहम
आओ आपस में खो जाएँ
कहलाएँ हम सच्चे हमदम।।।।
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