डॉ. राम कुमार झा "निकुंज" - नई दिल्ली
आनंद सुरभि यश गायन हो - गीत - डॉ. राम कुमार झा "निकुंज"
शनिवार, अक्टूबर 17, 2020
ओंकार शान्ति मन भावन हो ,
परमेश भजन नित सावन हो,
अभिलाष हृदय सेवन भारत,
आनन्द सुरभि यश गायन हो।
परमार्थ निकेतन जीवन हो,
अरुणाभ भोर शुभ कारज हो,
हो सत्य पथिक यायावर जग,
सारस्वत विवेक मन सारथ हो।
सत्संग मुदित गति चाल नवल,
नीलाभ ललित निशिचन्द्र विमल,
तज मोह भोग भौतिक साधन,
अनुराग राष्ट्र हित जीवन हो।
आनन्द धरा सब पेट भरे,
सब जन शिक्षा नित सुलभ बने,
मानवीय मूल्य संवाहक जन,
नैतिक सरसिज शुभ चरित खिले।
आचार विनत नवनीत प्रकृति,
समुदार हृदय करुणा झंकृति,
क्षुधार्त शमन हो गेह वसन,
मुस्कान अधर जन जीवन हो।
सुविचार सतत नव दीप बने,
बलिदान राष्ट्र हित गीत बने,
परिवार धरा माने चितवन,
सम्मान श्रेष्ठ आशीष मिले।
नित मातु पिता रज चरण कमल,
गुरुजन सन्नधि सुखकारक हो,
ओंकार जगत् सत्पावन पथ,
परपीडहरण नारायण हो।
नवकीर्ति सृजन सत्कर्म फलन,
कुशाग्र बुद्धि हित साधन हो,
रवि किरण समा अभिलाष मना,
संघर्ष बाध समझ फल पूरण हो।
देशार्थ जिया परमार्थ धरा,
मनुज,क्षणिक गात्र सफल समझो,
मलवाहक तन नव कीर्ति भरा,
परब्रह्म कृपा जीवन समझो।
काय अनिल क्षिति जल पावक नभ,
हो निर्मित सदा नश्वर आरभ,
अनमोल धरोहर ईश्वरकृत,
नायाब पुण्य साधक समझो।
निर्माण नया नव जीवन हो,
अनुसन्धान धरा कल्याणक हो,
हो शौर्य वतन खल रिपुसूदन,
सत् त्याग न्याय पथ चिन्तन हो।
जन कण्ठनाद जय भारत हो,
अनुनाद हिन्द यश गायक हो,
बने विश्वगुरु जग शक्ति शिखर,
पुरुषार्थ क्षमा जय नायक हो।
नीलाभ कीर्ति अरुणाभ कर्म,
समदर्श भाव सुख क्षितिज मिले,
शुभ हरित भरित भू सिन्धु गगन,
राष्ट्र नेह चमन हरि भक्ति खिले ।
रोगमुक्त लोक रत योग सबल,
मन स्वस्ति, स्वच्छ कानन द्रुम दल,
सुख चन्द्रहास निशि कुमुद गन्ध,
अरुणिम प्रभात नव शक्ति बने।
नारायणी नार्य शक्ति समझ़,
करुणा ममता अनुरक्ति समझ,
सम धरा सदय वात्सल्य हृदय,
नव दुर्गा भारत माँ समझो।
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