अन्जनी अग्रवाल "ओजस्वी" - कानपुर नगर (उत्तरप्रदेश)
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ - कविता - अन्जनी अग्रवाल "ओजस्वी"
मंगलवार, अक्टूबर 13, 2020
अजन्मी बेटी, करती पुकार।
मत करो, मेरे आस्तित्व का तिरस्कार।।
मैं भी तो हूँ, तेरी कल्पना।
दूँगी बना, तेरा जीवन अल्पना।।
दे दो मेरे, अस्तित्व को पहचान।
मैं भी तो हूँ, धरती का वरदान ।।
मुझसे न होगा, तेरा सम्मान कम।
दे दे मुझे भी अब शारीरिक अंग।।
पढ़ा-लिखा बना देना मुझे महान ।
मैं तो बनूँगी, माँ तेरा अभिमान।।
होकर बड़ी, बनूँगी पापा का गुरुर।
दूँगी कर, सारी बदनसीबी को दूर।।
बन सकती मैं भी भारत की शान।
गर दिया, तूने मुझे, जीवन दान।।
अमेरिका, रूस, क्या आगे ।
हम भी तो हैं, देश के सच्चे धागे।।
दे दो मुझे अब जीवन का उपहार।
दूंगी संवार तेरा सारा घर संसार ।।
पापा की गुड़िया, माँ तेरी दुलारी।
होकर बड़ी, बनूँगी होनहार नारी।।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ नारा ।
कर दो पूरा, लगा जतन सारा ।।
पढा-लिखा, देना बना सुलक्षणा।
होगा तभी पूरा, मोदी जी का सपना।।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर