अन्जनी अग्रवाल "ओजस्वी" - कानपुर नगर (उत्तरप्रदेश)
कान्हा से पुकार - कविता - अन्जनी अग्रवाल "ओजस्वी"
शुक्रवार, अक्टूबर 16, 2020
मोह माया, स्वार्थ छल।
नही है, अब कोई हल।।
दिल देता बधाई, बारम्बार।
हो खुशियों भरा, त्यौहार।।
पर आशाएं, हैं भरी पड़ी।
कान्हा दो, खुशियाँ बड़ी बड़ी।।
कोरोना काल, होता नही खत्म।
जरा धो दो, अब ये जख्म।।
निरोग का अमृत, बरसा दो।
ऐसी अब कोई, धुन बजा दो।।
अशांत मन, आस्थाएं त्यागे।
छल कपट भरा, कोरोना भागे।।
प्रीत तुम्हारी, न होगी अब कम।
बिन जीवन, कैसे करें भजन हम।।
घर मन्दिर, सारे बन्द पड़े।
स्तुति को, जोड़े हाथ खड़े।।
तुम बिन अब, न कोई सहारा।
जिसने हर विपदा से पार उतारा।
बिन तेरी धुन, राधा भी बेचैन।।
न मिले दिन में, न रात में चैन।।
कर दो ऐसा, कोई चमत्कार।
हो जाए चहुओर, जयजयकार।।
हो मन प्रफ़ुल्लित, सब प्रकार।
मनाएं हर्षोल्लास से, ये त्यौहार।।
एक बार तो, जग को निहारो।
मानव को, इस त्रासदा से उबारो।।
करती विनती अन्जनी कर जोड़।
ला दो कोरोना का, कोई तोड़।।
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