बजरंगी लाल - दीदारगंज, आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश)
राम-राज को क्यों करते बदनाम - कविता - बजरंगी लाल
शुक्रवार, अक्टूबर 30, 2020
इस राम-राज का अब तक था मैं,
सुनता बड़ा बखान,
जहाँ नहीं है कोई सुरक्षित
माँ, बेटी, बहन व जवान,
इसी राम-राज में लूट रहे हैं,
इज्ज़त कुछ शैतान,
फिर इसको क्यों राम-राज कह,
राम-राज को करते हो बदनाम।।
राम-राज और राम सा जग में
नहीं है कोई महान,
राम सदृश तो राम हैं केवल,
दूजा ना इंसान,
लूट-पाट हत्या, बलात्,
का होना हो जहाँ आम,
फिर उसको क्यों राम-राज कह,
राम-राज को करते हो बदनाम।।
नारी की लाज बचाने को,
छेड़ा जिसने संग्राम,
रावण जैसे पराक्रमी को,
दिया मृत्यु का धाम,
पर यहाँ बलात्कारियों को,
मिलता है सत्ता से सम्मान,
फिर इसको क्यों राम-राज कह,
राम-राज को करते हो बदनाम।।
राम सभी के परम् पूज्य हैं,
राम हैं गुण की खान,
इस कलयुग में कल्पना मात्र है,
राम-राज सा जहान,
जहाँ हक की खातिर डंडे खाते हों,
बेबस छात्र और किसान,
फिर उसको क्यों राम-राज कह,
राम-राज को करते हो बदनाम।।
जहाँ सीता रौंदी जाती हों,
नहीं बचाते राम,
जहाँ पंचाली का चीरहरण हो,
आते नहीं हैं श्याम,
ऐसे राज को कैसे हम
कह दें रघुनन्दन धाम,
फिर इसको क्यों राम-राज कह,
राम-राज को करते हो बदनाम।।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर