प्रीति बौद्ध - फिरोजाबाद (उत्तर प्रदेश)
जाति - कविता - प्रीति बौद्ध
मंगलवार, नवंबर 10, 2020
यह जो हमारी जाति है।
वह कभी न जाती है।।
इस जाति ने बहुत ही सताया है
ऊंचे पदों का अपमान कराया है
यह किसी ने षड्यंत्र रचाया है
कुदरत ने सबको मानव बनाया है
सूर्या हवा ना माने जाति-पाती है।
यह जो हमारी जाति है।
वह कभी ना जाती है।।
नीर न करता भेद कभी
बर्तन में भरते इसे सभी
कंठ सूखे पी लो अभी
मैं नहीं मानती, जाति है।
यह जो हमारी जाति है।
वह कभी ना जाती है।।
पवन सबको एक जैसा भाया
शशि चांदनी सबको देता आया
अवनी बिना भेद भार उठाया
नदियां, झरना, अंबर, अवनी
सबने माना मानव ही जाति है।
यह जो हमारी जाति है।
वह कभी न जाती है।।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर