कानाराम पारीक "कल्याण" - साँचौर, जालोर (राजस्थान)
दिल के घाव हरे हो गए - कविता - कानाराम पारीक "कल्याण"
बुधवार, दिसंबर 09, 2020
बदहाली की एक तस्वीर जब नज़र आई ,
तन के सब रोम-रोम खड़े हो गए ।
जो काफी समय पूर्व ही भर चुके थे ,
वो दिल के घाव फिर हरे हो गए ।
आज उन हालातों को जब मनभर देखा ,
इस जीवन के संघर्ष में बीत जो गए ।
बेसहारा होकर भी हम किस तरह ,
गर्त्त से निकलकर बाहर हो गए ।
हर तरफ हार की लहरे उठती थी ,
अथाह सागर तैरकर किनारे आ गए ।
हार में भी जीत की मिसाल बनकर ,
आज हम कई दिलों पर छा गए ।
कितना कष्ट भरा वह सफर था ,
लोग दुखती नब्ज़ छोड़ दूर हो गए ।
कैसे ग़म-भरे दिन बीता करते थे ,
वो जीने की राहों में दस्तूर हो गए ।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर