डॉ. अवधेश कुमार "अवध" - गुवाहाटी (असम)
घर का रास्ता - कविता - डॉ. अवधेश कुमार अवध
शुक्रवार, दिसंबर 11, 2020
यह कविता अवध की लेखनी से जन सरोकार के महाकवि श्रद्धेय मंगलेश डबराल जी को विनम्र श्रद्धांजलि है।
जनकवि
मंगलेश डबराल
हिंदी के सहज सरल संवेदनशील
सच्चे लाल
जलाकर "पहाड़ पर लालटेन"
अपने असली "घर का राश्ता" पकड़कर
चले गए अकाल
"हम जो देखते हैं"
वही कहते हैं
वही लिखते हैं
वही छापते भी हैं
और सुनो न
"आवाज भी एक जगह है"
इसे उठाने और दबाने में ही तो
संविधान बन जाते हैं
संशोधन दर संशोधन होते हैं।
नए युग में
बहुत कुछ बदल जाता है
नए युग में मित्र भी
"नए युग में शत्रु" भी
इतना ही नहीं
हमारी वर्णमाला में
बहुतेरे वर्ण के मायने भी
नहीं बदले तो बस
काल के क्रूर नियम
और हिंदी के उन्नत भाल
श्रद्धेय मंगलेश डबराल।
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