रमेश चंद्र वाजपेयी - करैरा, शिवपुरी (मध्य प्रदेश)
चुप रहती है शमा - कविता - रमेश चंद्र वाजपेयी
सोमवार, जनवरी 11, 2021
लोगों के मुँह से
हमने हैं सुना
जल मरता है परवाना
चुप रहती है शमा।
न वो प्यार रहा
न रही वो
प्रीत वफ़ाई,
हर दीवाना
लैला मे हैं रमा।
बसा के
अपने लम्हो मे
करते है वादा
उम्र भर का।
खाते है क़समें
बहाते है आँसू,
ऊब जाते
न साथ दे पाते।
प्यार कि डगर का।
उनका कैसे करें एतवार
खुशियों मे साथ चलते,
दुःख मे रहते हैं जमा।
लोगों के मुँह से
हमने हैं सुना
जल मरता है परवाना
चुप रहती है शमा।
पीड़ा देकर
चल पड़े यों
मानो
इन्हें कुछ
हुआ ही नहीं।
किसी की जान
घुट रही है
कोई आहों मे डूबा,
फिर भी प्यार
सर सब्ज़ नहीं।
आशिक़ समझा
वो मेरी
मैं उसका
पर शमा का
दिल किसी और
मे हैं रमा।
लोगों के मुँह से
हमने हैं सुना
जल मरता है
परवाना,
चुप रहती है शमा।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर