कवि कुमार प्रिंस रस्तोगी - सहआदतगंज, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
मन के भाव - कविता - कवि कुमार प्रिंस रस्तोगी
शनिवार, फ़रवरी 06, 2021
मन जैसा नहीं है कोई
पल भर में जो बदले,
मन भावों का सागर है
सागर में जन डोले,
थोड़ा मनमौजी है मन
थोड़ा स्वार्थ भाव तन घोले,
मन जिनका है विश्वजीत
वो कनक भाव से बोले,
ये जीवन है भावों का
कवि भावों की भाषा बोले।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर