संजय राजभर "समित" - वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
वक़्त - कविता - संजय राजभर "समित"
गुरुवार, फ़रवरी 25, 2021
हाँ मैं वक़्त हूँ,
परिवर्तन हूँ।
देखा है अनंत काल से
और देखता रहूँगा
अब विचलित होता नही मैं
वीभत्स से
महा प्रलय से
सुख-दुःख से
हास्य-विनोद से,
सृजन-विनास से,
क्योंकि सम भाव का पाबन्द हूँ।
हाँ मैं वक़्त हूँ
परिवर्तन हूँ।
मैं ही ईश्वर हूँ,
अवतार!!
पता नही कब हुआ?
मैं कैसे जन्म ले सकता हूँ?
कौन क़िस्से गढ़ दिया धरा के कोने-कोने में?
हज़ारों नाम,
लाखों पद्धतियों में पूजा जाता हूँ
सब अंधविश्वास है
मैं सहज सरल ह्रृदयस्थ हूँ।
हाँ मैं वक़्त हूँ
परिवर्तन हूँ।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर