डॉ. ममता बनर्जी "मंजरी" - गिरिडीह (झारखण्ड)
बढ़ेगा आगे भारत (भाग ५) - कविता - डॉ. ममता बनर्जी "मंजरी"
गुरुवार, मार्च 04, 2021
(५)
मिटे हजारों देश, आज तक इस धरती में।
मिले भग्न अवशेष, यथा भू की परती में।।
बनकर कई ग़ुलाम, तजे निज संस्कृति प्यारी।
हुए कई बेनाम, संगिनी थी लाचारी।।
अपना देश महान, ग़ुलामी का था मारा।
लेकिन सीना तान, वीर सम था हुंकारा।।
काँप गए ब्रिटिश, दबाए दुम थे भागे।
जगत झुकाया शीश, वीर भारत के आगे।।
किंतु हाय तकदीर! हुआ खंडित शुचि भारत।
खींची गई लकीर, हुई जनता हत-आहत।।
फंडा तितर-बटेर, न समझे भारतवासी।
हुई एकता ढेर, चली जब चाल सियासी।।
गए वतन-ए-पाक, सहस्रों जन बन-ठन कर।
जमा लिए निज धाक, बंधु-भाई को तज कर।।
लेकिन भारतवर्ष, मनुजता घोर निभाई।
दिखा दिया सहर्ष, सभी को निज प्रभुताई।।
दिए सभी अधिकार, खुशी से भर कर झोली।
संग मनाए ईद, संग ही खेली होली।।
धन्य हमारा देश, नहीं इसके सम दूजा।
करो समापन क्लेश, करो रे इसकी पूजा।।
हम सब हैं नागरिक, हमें रहना भारत में।
सदा रहेंगे एक, देश की हर हालत में।।
अपना देश महान, चलो हम करें इबादत।
हम सबका अरमान, बढ़ेगा आगे भारत।।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर