डॉ. सरला सिंह "स्निग्धा" - दिल्ली
गौरैया - कविता - डॉ. सरला सिंह "स्निग्धा"
सोमवार, मार्च 22, 2021
मैं नन्ही छोटी गौरैया,
बोलो तेरा क्या लेती थी।
चुगती थी दाने दो चार,
खुशियाँ तेरे घर भर देती थी।
नन्हा सा इक मेरा घोंसला,
वो भी तुझको ना भाया।
कंक्रीट के महल बनाए,
मेरे घर को दिया उजाड़।
चार बूँद पानी को तरसूँ,
दाने भी ना अब पाती हूँ।
घर भी मेरा नहीं है जिसमें,
अपने दो बच्चे सकूँ मैं पाल।
गौरैया दिवस तू खूब मनाता,
मन से भी क्या तूने सोचा है।
दे पाए तो दे देना मुझको,
मेरा घर बस मुझको उपहार।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर