एल॰ सी॰ जैदिया 'जैदि' - बीकानेर (राजस्थान)
हैवानियत हावी है अब इंसानियत पर - ग़ज़ल - एल. सी. जैदिया "जैदि"
शनिवार, अप्रैल 03, 2021
हैवानियत हावी है अब इंसानियत पर,
तरस खाता नहीं है कोई मासूमियत पर।
भूल से भरोसा मत करना इस जहाँ में,
बैठा हो ज़ालिम चाहे जिस हैसियत पर।
हालात अजीब है औरत की आबरु का,
शक होता है, हर किसी की नियत पर।
ख़ौफ़ से गुज़रती है साँसे, देखो उसकी,
कोई आँसू बहाता नहीं है अहमियत पर।
माँ-बहन, बहू-बेटी है कई रूप इसके,
आओ गर्व करे सब, ऐसी ख़ासियत पर।
हे! बंदे बदल जा, इल्तिजा है 'जैदि' की,
है वक़्त अभी भी आ जा असलियत पर।
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