श्याम सुन्दर श्रीवास्तव "कोमल" - लहार, भिण्ड (मध्यप्रदेश)
धीरज न खोना - कुण्डलिया छंद - श्याम सुन्दर श्रीवास्तव "कोमल"
सोमवार, अप्रैल 26, 2021
कोरोना है कर रहा, अब ताण्डव बिकराल।
रूप बदल कर ज्यों यहाँ, नाच रहा है काल।।
नाच रहा है काल, परी है मारा-मारी।
मानवता लाचार, हुई है ज्यों बेचारी।।
कह 'कोमल' कविराय, किन्तु धीरज ना खोना।
ईश्वर पर विश्वास, भगेगा यह कोरोना।।
कैसी है यह आपदा, आन पड़ी बिकराल।
सावधान हो जाइए, बहुत बुरा है हाल।।
बहुत बुरा है हाल, मास्क से मुखड़ा ढकिए।
सेनेटाइजर आप, साथ में हरदम रखिए।।
कह 'कोमल' कविराय, घड़ी मुश्किल की ऐसी।
संकट लेकर आज, मुसीबत आई कैसी।।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर