सुषमा दीक्षित शुक्ला - राजाजीपुरम, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
उपकार - लघुकथा - सुषमा दीक्षित शुक्ला
शुक्रवार, अप्रैल 02, 2021
लॉकडाउन में परदेस में फँसे राजू रिक्शा वाले के पास घर वापसी के पैसे भी ना थे ऊपर से उसका घर वहाँ से पूरे 400 किलोमीटर दूर था।
बेचारा भूखा प्यासा राजू अपने रिक्शे को ही हमसफ़र बना घर की राह वापस हो लिया। रिक्शे पर उसने कुछ सामान रख लिया था जो उसकी परदेस में कमाई कुल पूँजी से लिया गया था।
रास्ते में मई की दोपहरी के वक़्त तेज धूप से हाँफते हुए प्यास से विह्वल हो उठा। वह पानी की तलाश करता आगे बढ़ रहा था कि एक गाँव में कुछ दूर पर नल दिखाई दिया।
राजू नल के पास पानी पीने के लिए ज्यों आगे बढ़ा ही था कि उसी गाँव के बुजुर्ग शंभू नाथ ने उसकी दशा को भाँपते हुए कहा कि बेटा धूप से चलकर खाली पेट पानी पियोगे तो नुकसान करेगा, आओ कुछ खा लो। रिक्शा वाले पर तो मानो भगवान को ही दया गई, वह तुरंत बूढ़े शंभू नाथ के आमंत्रण पर उनकी झोपड़ी की तरफ़ चल दिया क्योंकि वह बहुत भूखा भी था। वहाँ शंभू नाथ ने उसे भरपेट खिचड़ी खिलाई और चलते वक़्त अस्सी रुपये भी यह कह कर दिए कि रख ले बेटा तेरे रास्ते में काम आएँगे।
राजू आश्चर्य से उनकी ओर देखता हुआ बोला, बाबा आपका यह उपकार कभी नहीं भूलूँगा!! मैं कैसे चुकाऊँगा यह आपका प्यार!!
उसकी आँखों मे चलते वक़्त अनायस ही कुछ आँसू छलक पड़े।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर