कवि कुमार प्रिंस रस्तोगी - सहआदतगंज, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
अब जाग उठो भारतवासी - कविता - कवि कुमार प्रिंस रस्तोगी
गुरुवार, जुलाई 15, 2021
अब जागो उठो हे भारतवासी!
आँखें खोलो हे अभिलाषी!
सपने पूरे करने को फिर
नया सवेरा हुआ अभिलाषी!
जो कष्ट सहे हैं जीवन में
दर्पण वो देखो अभिलाषी!
जीवन जन्म बने अविनाशी,
अब जाग उठो हे भारतवासी!
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