सुधीर श्रीवास्तव - बड़गाँव, गोण्डा (उत्तर प्रदेश)
काले मेघ अब बरस जाओ - कविता - सुधीर श्रीवास्तव
शनिवार, जुलाई 17, 2021
आसमान में लुका छिपी का
खेल अब और न करो,
हमारी उम्मीदों पर
अब आरी न और चलाओ।
हे काले मेघ तरस खाओ
बस एक बार जमकर बरस जाओ,
धरा की प्यास बुझाओ
किसानों के बुझते चेहरों पर
अब तो मुस्कान लाओ।
प्रकृति की मुरझाती हरियाली को
संजीवनी तो दे जाओ।
सूखे हैं ताल पोखर
सूख रहे हैं नदिया नाले,
झूम के बरसो काले मेघा
उनके दामन को भी भर जाओ,
अब और न तरसाओ
काले मेघ बरस भी जाओ।
गर्मी से व्याकुल हम सब है,
बच्चे भी बिलबिला रहे हैं
पेड़ पौधे सूख रहे हैं,
पशु पक्षी भी व्याकुल हैं,
किसानों में भी बेचैनी है,
देखो! विनती सभी कर रहे,
काले मेघ अब बरस भी जाओ।
लुकाछिपी अब बंद करो
इतनी सौग़ात अब दे ही जाओ,
हर ओर ख़ुशियाँ बिखराओ,
काले मेघ अब बरस भी जाओ।
केवल धरती की बात नहीं है
चारों ओर ख़ुशहाली फैलाओ,
हर जीवन में शीतलता लाओ,
काले मेघ अब बरस भी जाओ।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर