अर्चना कोहली - नोएडा (उत्तर प्रदेश)
ख़्वाहिशें - कविता - अर्चना कोहली
मंगलवार, सितंबर 21, 2021
उच्छल जलधि तरंग सी ख़्वाहिशें,
नहीं है इस पर कोई भी बंदिशें।
जीवन-रंगमंच पर फैले इसके पंख,
अधूरी होने पर न करें कोई रंजिशें।।
अंतर्मन में अनंत ही ख़्वाहिशें होती हैं,
सतरंगी सपनों के सुंदर बीज बोती है।
पर हरेक ख़्वाहिश रह जाती है अधूरी,
तक़दीर कहाँ बस में सभी के होती है।।
अंतिम साँस तक यही हमारे संग रहते,
संघर्ष से कभी निज ख़्वाब बिखरते।
तो कभी कठिन श्रम से जाती निखर,
जीवन में ख़ुशी के रंग यही तो भरते।।
दिल के मंदिर में हमने इसे सजाया है,
निज तक़दीर को इससे ही बनाया है।
सोते-जागते मैंने सतरंगी स्वप्न देखे,
नभ छूने का सुंदर सफ़र तय किया है।।
दिन-रात आत्म-मंथन हम करते रहते,
ख़्वाबों के सुंदर आगार दिन-रात बनते।
कभी मँझधार में फँस जाते नैया सम,
तो धैर्य से प्रयास करने से पा ही लेते।।
ख़्वाब पूरे करने को एक धरातल चाहिए,
मनोबल-साहस-सा सुंदर बंधन चाहिए।
लक्ष्य-भेदन का मार्ग चाहिए हमें अगर,
तो अर्जुन-सी एकाग्रता भी तो चाहिए।।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर