गोपाल जी वर्मा - कदम कुआँ, पटना (बिहार)
पेड़ - कविता - गोपाल जी वर्मा
शनिवार, सितंबर 18, 2021
हरे पेड़,
भरे पेड़,
आँधी तूफ़ान से,
लड़े पेड़।
धूप में छाँव देने को,
खड़े पेड़।
फल-फूल देने के लिए,
सजे पेड़।
झूला झूलने के लिए,
निभे पेड़।
खिड़कियों, दरवाज़ों के लिए,
कट पड़े पेड़।
मरने के बाद हमें
जलाने को भी,
तैयार खड़े पेड़।
इतना बतला दो हमें कोई
हम पेड़ के
किस काम आए परस्पर?
सजे पेड़, झुके पेड़, खिले पेड़,
हम कहाँ रहे?
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर