शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली' - फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)
बगुले पंख तुम्हारे - गीत - शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली'
सोमवार, अक्टूबर 18, 2021
कितनी राजनीति खेलेंगे
बगुले पंख तुम्हारे?
जिजीविषा त्यागी मौनी व्रत
एक पैर तन साधे।
कोई मीन दिखाई देती
खाते कह कर राधे।
आज झील कल सरिता बैठे
पोखर नार पनारे।
उड़ने का गुण तुममें भी है
धरा छोंड़ उड़ जाते।
बने रहे विष कुंभ पयोमुख
लोग नहीं पढ़ पाते।
बगुल भक्ति को सदा पूजते
सत्ता के गलियारे।
बड़े बने तो बनते जाते
छोटे पिसते जाते।
बढ़ता है परिवार तुम्हारा
बढ़ते धन के खाते।
कुर्सी बनी रहे कुछ ऐसे
सदा डालते चारे।
भारत माता ही जीवन है
कहते तन-मन धारे।
नहीं चलेगी नीति तुम्हारी
जागे सब रखवारे।
वही मनुज जो जिए राष्ट्र हित
क्षीर-नीर गुण धारे।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर