अर्चना कोहली - नोएडा (उत्तर प्रदेश)
उल्लास - कविता - अर्चना कोहली
शुक्रवार, अक्टूबर 29, 2021
उल्लास की तरंग से मन होता प्रफुल्लित,
त्यौहारों की रुत से हमारा अंतर्मन है हर्षित।
अद्वितीय होते हैं सतरंगी ये सभी ही त्योहार,
उमंग-उल्लास का देते हमें अमोल उपहार।।
एक ही तरह के कार्यों से जब मन ऊब जाता,
थकान-असंतुष्टि से जब हमें कुछ भी न भाता।
तब त्यौहारों की मौज़-मस्ती ख़ुशी अपार देती
अद्भुत-सी ताज़गी-स्फूर्ति मन में भर जाती।।
जीवन हमें पल पल नए-नए अनुभव देते हैं
कड़वे-मीठे पलों से रू-ब-रू करवाते रहते हैं।
तब नवीन संचार-से आशा के दीपक जलते हैं
सकारात्मकता से दिल हमारा रोशन करते हैं।।
उल्लसित परिवेश संगीतमय धुन सा लगता है,
पंछियों के कलरव-सा दिल में घुलता रहता है।
देश के कोने-कोने में हर्ष-तरंगें बिखरी रहती,
इनसे ही सतरंगी सपनों की सुंदर कड़ी बनती।।
जन्म से मृत्यु तक हर्ष के अवसर आते रहते,
बरखा-बौछारों-सा वे तन-मन सराबोर करते।
अगर हमारे जीवन में न होता हर्ष-उल्लास,
तो कैसे कभी आ पाते ख़ुशी के पल पास।।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर