शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली' - फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)
बात - दोहा छंद - शिव शरण सिंह चौहान 'अंशुमाली'
शुक्रवार, दिसंबर 24, 2021
कौन कहाँ अति बोलता, कौन कहाँ सहि लेत।
सहिष्णुता भारी पड़ी, चक्रवात सम बेंत।।
बात होत है मधुकरी, प्राण देय बल गात।
अपशब्दन की कोठरी, जस अँधियारी रात।।
कबहुँ कटुक नहिं बोलिए, अमृत बरसै बात।
'अंशु' धरा से नभ चढै, प्रगति पंथ अवदात।।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर