सुधीर श्रीवास्तव - बड़गाँव, गोण्डा (उत्तर प्रदेश)
बसंत - कविता - सुधीर श्रीवास्तव
शनिवार, फ़रवरी 05, 2022
ऋतुराज बसंत जब आता है,
संग माँ सरस्वती को लाता है।
माघ मास शुक्ल पक्ष को,
बसंत पंचमी भी साथ लाता है।
माँ धवलधारिणी, माँ ज्ञानदायिनी,
माँ वीणावादिनी, माँ शारदे,
माँ सरस्वती की पूजा आराधना
सब ज्ञान पिपासु करते हैं,
माँ की कृपा, आशीष से
स्व ज्ञान का भंडार भरते हैं।
बासंती परिधान धारकर
माँ का पूजन अर्चन करते,
माँ को बासंती पुष्प अर्पित कर
केसरिया चावल का भोग लगा
माँ को अपना शीष नवाते,
सरसों के खिले पीले पुष्प
पीले चादर सा अहसास कराते।
तितलियों के नृत्य नैसर्गिक आनंद देते,
भौंरे गुँजन कर कलियों के रस पीते,
मधुमक्खियाँ भी इन दिनों
छत्तों में मधु का भंडार भरतीं।
अद्भूत छटा बसंत की देख
हम सब पुलकित हो उठते हैं,
खोकर सुध-बुध अपनी-अपनी
प्रेम सागर में डुबकियाँ लगाते हैं,
बसंत की ख़ुशियों में डूब हम
बसंतोत्सव उत्साह से मनाते हैं।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर