डॉ॰ कमलेन्द्र कुमार श्रीवास्तव - जालौन (उत्तर प्रदेश)
मुख्य पृष्ठ
कविता
प्रार्थना
भक्ति
माँ सरस्वती
ज्ञान दायनी माता मेरी नैया पार लगा दो - कविता - डॉ॰ कमलेंद्र कुमार श्रीवास्तव
ज्ञान दायनी माता मेरी नैया पार लगा दो - कविता - डॉ॰ कमलेंद्र कुमार श्रीवास्तव
शनिवार, फ़रवरी 05, 2022
दूर-दूर तक तम ने अपनी,
चादर है फैलाई।
तरस रहे हम उजियारे को,
तम ने कला दिखाई।
तम को दूर भगा दो अम्बे ज्ञान का दीप जला दो।
ज्ञान दायनी माता मेरी नैया पार लगा दो।।
जो लिखना मैं चाहूँ मैया,
झट से मैं लिख डालूँ।
दिशा दिखाए मेरा लेखन,
मंज़िल को मैं पा लूँ।
ज्ञान दीप के पथ पर मैया काँटे सभी हटा दो।
ज्ञान दायनी माता मेरी नैया पार लगा दो।।
निर्मल कर दो मेरे हिय को,
बुद्धि, विद्या का वर दो।
सतत लेखनी चलती जाए,
माँ मधुरिम स्वर दो।
कलुष ह्रदय को दूर करो माँ नई दिशा दिखला दो।
ज्ञान दायनी माता मेरी नैया पार लगा दो।।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर