चंद्रमणि ओझा - मऊ, चित्रकूट (उत्तर प्रदेश)
मेरे प्रभु - कविता - चंद्रमणि ओझा
शुक्रवार, फ़रवरी 11, 2022
हे प्रभु! तुम्हीं बस हो एक हमारे,
तुम्हीं हो नैया तुम्हीं किनारे।
तुम्हारी करुणा में जी रहे हम,
तुम्हीं से चलती साँसें है हरदम।
ये कह रही है हर एक धड़कन,
तुम्हारे बिन अब लगता नहीं मन।
हर नेत्र हर दुनिया में समाकर,
दिखाते सब कुछ स्वयं छिपाकर।
तुम्हारी सूरत की क्या कमी है,
जहाँ भी देखें वही ज़मी है।
हम क्या कहें प्रभु तुम्हारे गुण को,
तुम्हीं हो सूरज चाँद सितारे।
हे प्रभु! तुम्हीं बस हो एक हमारे,
तुम्हीं हो नैया तुम्हीं किनारे।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर