नृपेंद्र शर्मा 'सागर' - मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश)
हमने भर ली उड़ाने ख़ता हो गई - ग़ज़ल - नृपेंद्र शर्मा 'सागर'
शुक्रवार, मई 06, 2022
हमने भर ली उड़ाने ख़ता हो गई,
सारी दुनिया ही हमसे ख़फ़ा हो गई।
आँधिया आ गई देख मेरी उड़ान,
जलने वालों की ये इंतिहा हो गई।
जिनको माना था ये मेरे अपने ही हैं,
काम थोड़ा पड़ा सबकी ना हो गई।
जिसको चाहा था हमने दिल-ओ-जान से,
जाँ की दुश्मन वही बेवफ़ा हो गई।
देखकर हाल दुनिया का ऐ दोस्तों,
मेरी सारी तमन्ना फ़ना हो गई।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर