पारो शैवलिनी - चितरंजन (पश्चिम बंगाल)
तुम मुझसे कह रही थी - कविता - पारो शैवलिनी
शनिवार, जून 25, 2022
दो दिन की मुलाक़ात में
दुनिया बदल गई थी।
हम तुम में खो गए थे
तुम मुझमें खो गई थी।।
तन्हाईयों में पाकर
किया प्यार मुझको जी भर
पागल सा कर दिया था
पागल सी हो गई थी।।
है बात दोपहर की
हम-तुम थे खोए-खोए
जी भर रुलाया मुझको
और ख़ुद भी रो रही थी।।
कैसे रहेंगे हम-तुम
होकर जुदा बता दो,
हम तुमसे कह रहे थे
तुम मुझसे कह रही थी।।
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