“मध्यक्षेण प्रकृति: सूयते सचराचरम् (श्रीमद्भगवद्गीता)”
“नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्धयेदकर्मणः॥”
सिद्धार्थ 'सोहम' - उन्नाओ (उत्तर प्रदेश)
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“मध्यक्षेण प्रकृति: सूयते सचराचरम् (श्रीमद्भगवद्गीता)”
“नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्धयेदकर्मणः॥”
सिद्धार्थ 'सोहम' - उन्नाओ (उत्तर प्रदेश)
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अकेले बैठना, चुप बैठना—इस प्रश्न की चिंता से मुक्त होकर बैठना कि ‘क्या सोच रहे हो?’—यह भी एक सुख है।
- अज्ञेय
अभिव्यक्ति के सारे माध्यम जहाँ निरस्त या समाप्त हो जाते हैं, शब्द वहाँ भी जीवित रहता है।
- केदारनाथ सिंह
कविता और प्रेम—दो ऐसी चीज़ें हैं, जहाँ मनुष्य होने का मुझे बोध होता है।
- गोरख पांडेय
साहित्यकार को चाहिए कि वह अपने परिवेश को संपूर्णता और ईमानदारी से जिए।
- फणीश्वरनाथ रेणु
संस्थापक (साहित्य रचना)
साहित्यकारों की हर एक रचना, उनकी बेशकीमती सम्पत्ति व एक उपलब्धि है।
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