रमाकान्त सोनी 'सुदर्शन' - झुंझुनू (राजस्थान)
दीवाली की जगमग रात - कविता - रमाकांत सोनी 'सुदर्शन'
रविवार, अक्टूबर 23, 2022
दीयों की रोशनी में जगमगा रही,
दिवाली की जगमग रात।
जहाँ-जहाँ राम ने चरण रखे,
हो रही ख़ुशियों की बरसात।
अमावस की काली रात भी,
रोशनी से रोशन हो रही।
घी के दिए जल रहे हैं,
घट-घट ख़ुशियाँ हो रही।
सज रहा हर कोना-कोना,
उत्साह उमंग उर में भरा।
होठों पर मुस्कान सभी के,
शृंगार करे पावन धरा।
ख़ुशहाली अधरों पर छाई,
जगमग दिवाली रात आई।
सुख समृद्धि सबके जीवन में,
वैभव भरे बजे शहनाई।
आस्था प्रेम सद्भावों के,
घट-घट में दीप जलते रहे।
जीवन ज्योति युक्त आलोकित,
ख़ुशियों के फूल खिलते रहे।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर