अनूप अंबर - फ़र्रूख़ाबाद (उत्तर प्रदेश)
संघर्ष - कविता - अनूप अंबर
मंगलवार, नवंबर 22, 2022
तिनका-तिनका बीन-बीन कर,
वो अपना नीड़ सजाता है ।
हवाओं का अभिमान तोड़ कर,
वो लक्ष्य को अपने पाता है॥
ये मेहनत का आराधक है,
आशाओं की लड़ियाँ सजाता है।
अपने भविष्य को सजाता है,
भोजन भी ढूँढ़ के लाता है॥
फिर तूफ़ान एक दिन आता है,
सब तहस नहस कर जाता है।
गिर जाते विशाल विपट भूधर,
तिनकों का नीड़ बिखर जाता है॥
देख रहा है वो उजड़ा बसेरा,
कुछ पल उदास हो जाता है।
फिर से मन में संकल्प उठा,
नव नीड़ पुनः बनाता है॥
कौन सिखाता है खग तुमको,
ये कैसे तू कर पाता है?
कहाँ से लाता इच्छाशक्ति,
कैसे ख़ुद को समझाता है?
कुछ सीखा दो मानव को भी,
ये क्यूँ हताश हो जाता है?
जीवन तो नाम है संघर्षों का,
फिर संघर्ष से क्यूँ घबराता है?
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर