अनूप अंबर - फ़र्रूख़ाबाद (उत्तर प्रदेश)
पक्षी की मन व्यथा - कविता - अनूप अंबर
रविवार, दिसंबर 04, 2022
तुम इंसानों को मुझ पर,
बिल्कुल तरस ना आया है।
मुझे बताओ मैंने किसको,
दुख दर्द भला पहुँचाया है॥
मैं वृक्षों पर विचरण करता था,
मीठे फल को खाता था।
आज़ादी से झूम-झूम के,
हर पल ख़ुशियाँ मनाता था॥
मानव तुमको तरस ना आया,
मुझको जाल में फँसा लिया।
मित्र और परिवार से मेरे,
अब बोलो क्यूँ है जुदा किया॥
ये तेरा दिया हुआ भोजन,
मुझे बिल्कुल भी ना भाता है।
मेरे पंख फड़फड़ाने को तरसे है,
मुझे ये आसमान बुलाता है॥
हम तो पक्षी है बेज़ुबान,
प्रतिकार नहीं कर सकते हैं।
ऐसे जीवन से मौत है बेहतर,
अब ग़ुलाम नहीं रह सकते है॥
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर