डॉ॰ रेखा मंडलोई 'गंगा' - इन्दौर (मध्यप्रदेश)
गणतंत्र दिवस - कविता - डॉ॰ रेखा मंडलोई 'गंगा'
बुधवार, जनवरी 25, 2023
स्वतंत्र देश में आया गणतंत्र,
आओ मिलकर ख़ुशी मनाएँ।
वासंती परिधान पहन कर,
मातृभूमि पर बलि-बलि जाएँ।
ऋतुराज भी स्वागत में देखों,
रंगीन फूलों को भर लाएँ।
भारत माँ की अखंडता को,
अब कोई आँच न आने पाएँ।
चाहे हिन्दू हो या मुस्लिम,
सब मिल-जुल ख़ुशी मनाएँ।
युवा वर्ग भी आगे आकर,
उत्साह से क़दम बढ़ाएँ।
बहा रक्त दी क़ुर्बानी जिसने,
वंदन उनको हम कर जाएँ।
देश के दुश्मनों को आज,
हम सब मिलकर दूर भगाएँ।
अमर शहीदों की क़ुर्बानी,
देखो व्यर्थ न जाने पाएँ।
उनके बलिदानों की गाथा,
आओ अब हम मिलकर गाएँ।
नील गगन में दूर-दूर तक,
तिरंगा लहर-लहर लहराएँ।
देश के स्वाभिमान को,
हम फिर से आज जगाएँ।
गणतंत्र दिवस की ख़ुशियों का,
आओ मिलकर जश्न मनाएँ।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर