धर्वेन्द्र सिंह 'बेदार' - भिवानी (हरियाणा)
कल पड़े जाना भले ही आज जाएँ जान से - ग़ज़ल - धर्वेन्द्र सिंह 'बेदार'
गुरुवार, मार्च 02, 2023
अरकान : फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन
तक़ती : 2122 2122 2122 212
कल पड़े जाना भले ही आज जाएँ जान से,
हम जिए हैं हम जिएँगे हम मरेंगे शान से।
ना-ख़ुदाओं के भरोसे नाव कैसे छोड़ दें,
ख़ुद बचाएँगे हम अपनी कश्ती को तूफ़ान से।
हाल ही में तुर्किए में ज़लज़ले के क़हर से,
हाथ धो बैठे बहुत से लोग अपनी जान से।
जान भी क़ुर्बान कर देंगे वतन के वास्ते,
हमको है बेहद मुहब्बत मुल्क हिंदुस्तान से।
ऐ अमीरी तू ही क्यों दुल्हन रईसों की बने,
ऐ ग़रीबी तू भी रच शादी किसी धनवान से।
ज़िंदगी के इम्तिहाँ में उन सवालों के जवाब,
होते हैं मुश्किल बहुत जो लगते हैं आसान से।
किसलिए आँसू बहाते हो किसी की मौत पर,
लौटकर आते नहीं मुर्दे कभी श्मशान से।
आप आख़िर आ गए 'बेदार' सच की राह पर,
ख़ैर छोड़ो ग़लतियाँ हो जाती हैं इंसान से।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर