संजय राजभर 'समित' - वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
किंकर्तव्यविमूढ़ - कविता - संजय राजभर 'समित'
मंगलवार, अप्रैल 25, 2023
कुछ बातें
अंदर ही अंदर
ज्वालामुखी की तरह
उमस करती है
तोड़ धरा की परतें
बाहर निकलने को तत्पर रहती है
किंकर्तव्यविमूढ़
कहूँ या न कहूँ!
कुछ बातें
बिना सुने ही
झकझोर देती है
कविगत भाव
अमुक अंतः भाव
आहिस्ते से सुन लेती है
अब उस अमुक से
सुनूँ या न सुनूँ।
पर सभी बातें
चुपके से
मेरी कविता में उतर आती है।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर