नौशीन परवीन - रायपुर (छत्तीसगढ़)
रहने दो अभी - कविता - नौशीन परवीन
रविवार, अप्रैल 23, 2023
रहने दो अभी
रहने दो अभी
फ़िलहाल मुझे किसी का
प्रेम स्वीकार नहीं करना
ना गोपनीय ना उजागर
व्यर्थ विषाद में
डूबकर
अपना उन्मुक्त भरा
जीवन नहीं त्यागना
जो निरुपाय हो
वह प्रेम में पुलकित होकर
बिन बुलाए नए
संत्रास को
जन्म दे और वह
दिगंबर उसी प्रेम में
डूबा रहे।
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