सुषमा दीक्षित शुक्ला - राजाजीपुरम, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
नए-नए ये कॉलेज के दिन - गीत - सुषमा दीक्षित शुक्ला
बुधवार, मई 24, 2023
नए-नए ये कॉलेज के दिन,
कट न पाएँ यारो के बिन।
नए-नए सब दोस्त मिले हैं,
लगते मगर पुराने हैं।
अपने-अपने से लगते हैं
कोई नही बेगाने हैं।
कभी हिफ़ाज़त कभी शरारत
करते हैं सब रात और दिन,
मन करता है जी भर जी लूँ
मस्ती करने वाले दिन।
नए-नए ये कॉलेज के दिन...
पहले पहल तो घबड़ाते थे,
रैगिंग से डर-डर जाते थे।
वही सीनियर अब लगते है,
भाई बहन औ गुरु समान।
कभी डाँटते कभी सिखाते,
कभी लुटाते सारा ज्ञान।
कैडेवर से डाइसेक्शन तक,
दौड़ भाग ये सारे दिन।
शुरू-शुरू की दो चोटी से,
आगे बढ़ने वाले दिन।
नए-नए ये कॉलेज के दिन...
गुरु देवों का नेह मिला है,
अच्छे कर्मों का ये सिला है,
अब ये जीवन खिला-खिला है।
मेस, होस्टल, क्लास, प्रैक्टिकल,
याद आएँगे फिर इक दिन।
सबसे न्यारे
नए-नए ये कॉलेज के दिन...
बचपन से अरमाँ थे अपने,
डॉक्टर बन जाने के।
मम्मी-पापा के ख़्वाबों को,
सुंदर पंख लगाने के।
पूरी करें उड़ाने अपनी,
मंज़िल पाने वाले दिन।
मानव सेवा करेंगे यारों,
देखेंगे ना रात या दिन।
नए-नए ये कॉलेज के दिन...
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर