रमाकांत चौधरी - लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश)
अब हम शहर में हैं - कविता - रमाकान्त चौधरी
शुक्रवार, जून 30, 2023
होते थे सौ मन गेंहूँ सौ मन धान
तमाम दलहन तिलहन
बड़ा सुकून था गाँव में।
गाँव का बड़ा खेत बेचकर
एक छोटा प्लॉट ख़रीदा शहर में
अब हम शहर में हैं।
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