सुबह - कविता - संजय राजभर 'समित'
बुधवार, जुलाई 19, 2023
सूरज का
नियति समय पर उदय होना
सुबह नहीं है
यह एक प्राकृतिक चक्र है
और कुछ नहीं,
सुबह
मानवतावादी होना
और
अच्छे संस्कारों का बीजारोपण है
जो हमेशा
तरोताज़ा रखता है।
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