रिमझिम सावन आया है - ताटंक छंद - संजय राजभर 'समित'
शनिवार, जुलाई 08, 2023
विरह वेदना की ज्वाला में,
तन-मन ख़ूब तपाया है।
आओ मेरे प्रियतम प्यारे,
रिमझिम सावन आया है।
प्यासी घटा की मर्म समझो,
गीत ख़ुशी के गाएँगे।
एक-दूजे में लीन होकर,
स्वरूप एक बनाएँगे।
आज धरा पर जल ही जल है,
जल ही नयन सुखाया है।
आओ मेरे प्रियतम प्यारे,
रिमझिम सावन आया है।
भोले बाबा के मंदिर में,
भीड़ उमड़ के आई है।
हरे रंग की पसरी चुनरी,
ओढ़ धरा शरमाई है।
उन्मुक्त मेघ गरज-गरज के,
सारी रात जगाया है।
आओ मेरे प्रियतम प्यारे,
रिमझिम सावन आया है।
नींद भरी मेरी आँखों में,
सुध-बुध खो बैठी हूँ मैं।
हृदय की सुवासित आँगन में,
तुझको ही पाती हूँ मैं।
कैसे कहूँ मैं और खुलकर,
सब बात 'समित' समझाया है।
आओ मेरे प्रियतम प्यारे,
रिमझिम सावन आया है।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर