रूशदा नाज़ - वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
भविष्य के सितारे - कविता - रूशदा नाज़
शुक्रवार, सितंबर 22, 2023
सुनो मेरे प्यारे!
तुम डरते क्यूँ हो?
भविष्य के सितारे सुनो!
तितलियों की उड़ान उड़ सकते हो
वो चाहत हो तुम
तुम सूर्य हो, तप सकते हो
अग्नि में रहकर जल सकते हो
सुनो मेरे प्यारे!
तुम डरते क्यूँ हो?
भविष्य के सितारे सुनो!
तुम पहाड़ हो अडिग रह सकते हो
अपने लक्ष्य पर अटल रह सकते हो
तुम चन्द्रमा हो, एकांत होकर भी चमक सकते हो
सुनो मेरे प्यारे!
भविष्य के सितारे सुनो!
पर्वत से निकलती बहती धारा हो
निरन्तर बहती लहर हो तुम
निःस्वार्थ, निश्चल
सुनो मेरे प्यारे!
तुम डरते क्यूँ हो?
भविष्य के सितारे सुनो!
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