अनूप अम्बर - फ़र्रूख़ाबाद (उत्तर प्रदेश)
हे गणपति! हे नाथ गजानन! - कविता - अनूप अंबर
मंगलवार, सितंबर 19, 2023
मैय्या तेरी पार्वती है,
तू शिव का है राजकुमार।
हे गणपति! हे नाथ गजानन!,
सुन लो अब मेरी पुकार।
तुमने जाने कितने जन तारे,
हम है नाथ अब तेरे सहारे।
मेरी नैया का तू ही खिबईया,
सब छोड़ दिया है तेरे हवाले।
प्रथम पूज्य हे नाथ गजानन!,
तुम ही जग का आधार।
मूसकराज की तेरी सवारी,
तेरी महिमा बड़ी निराली।
द्वार पर तेरे खड़ा सावली,
भर दो मेरी झोली खाली।
तेरे दर पे देखो बप्पा,
है भक्तों की भरमार।
नैन आस लगाए हुए हैं,
हम जग के ठुकराए हुए है।
फिर भी तुमको सदा पुकारा,
ठोकर ही ठोकर खाए हुए है।
शिव के तनय गौरी के नंदन,
कर लो विनती स्वीकार।
शिव का तो अभिमान है गणपति,
माँ गौरी का वरदान है गणपति।
अब देर करो न हे नाथ! हमारे,
ये अम्बर तो है बस तेरे सहारे।
करो लेखनी मेरी सार्थक,
तो हो जाए उद्धार।
साहित्य रचना को YouTube पर Subscribe करें।
देखिए साहित्य से जुड़ी Videos
साहित्य रचना कोष में पढ़िएँ
विशेष रचनाएँ
सुप्रसिद्ध कवियों की देशभक्ति कविताएँ
अटल बिहारी वाजपेयी की देशभक्ति कविताएँ
फ़िराक़ गोरखपुरी के 30 मशहूर शेर
दुष्यंत कुमार की 10 चुनिंदा ग़ज़लें
कैफ़ी आज़मी के 10 बेहतरीन शेर
कबीर दास के 15 लोकप्रिय दोहे
भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है? - भारतेंदु हरिश्चंद्र
पंच परमेश्वर - कहानी - प्रेमचंद
मिर्ज़ा ग़ालिब के 30 मशहूर शेर