पुनेश समदर्शी - जनपद, एटा (उत्तर प्रदेश)
शिक्षक दिवस - कविता - पुनेश समदर्शी
सोमवार, सितंबर 04, 2023
शिक्षक दिवस पर प्यारे बच्चों देना ये उपहार,
जातिवाद से ऊपर उठकर करना मानव व्यवहार।
छुआछूत और भेदभाव में कभी नहीं उलझना,
मानव-मानव एकसमान हैं हाँ सभी सुलझना।
नारी का तुम सभी रूप में सम्मान सदा ही करना,
माँ, बहना, बेटी, पत्नी का अपमान कभी ना करना।
झूठ, अन्याय और अत्याचार पर करना तुम प्रहार,
शिक्षक दिवस पर प्यारे बच्चों देना ये उपहार।
शिक्षा में परचम लहराना छूना शिखर सदा ही,
गुरुजन और बृद्धजनों का करना सम्मान सदा ही।
क़दम जमाना सदा सत्य पर, लालच ना कोई डिगा सके,
कर्तव्य निभाना सदा अडिग हो, भय ना कोई हिला सके।
जहाँ-जहाँ तुम प्यारे बच्चों शिक्षा का दीप जलाओगे,
वहाँ-वहाँ तुम प्यारे बच्चों सम्मान मुझे दिलाओगे।
देश-विदेश में ख्याति पाकर करना तुम शिक्षा प्रसार,
शिक्षक दिवस पर प्यारे बच्चों देना ये उपहार।
आजीवन तुम प्यारे बच्चों स्वाभिमान ना झुकने देना,
आजीवन तुम प्यारे बच्चों शिक्षा दीप ना बुझने देना।
बात करोगे मानवता की, विश्व पताका फहराओगे,
सारे जहाँ में प्यारे बच्चों राष्ट्र ध्वज लहराओगे।
समान दृष्टि से देखोगे तुम, बहेगी समदर्शी फुहार,
शिक्षक दिवस पर प्यारे बच्चों देना ये उपहार।
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