स्त्री - कविता - संजय राजभर 'समित'
सोमवार, सितंबर 25, 2023
स्त्री
एक आनंद है
सकल ब्रह्मांड है
तो एक गंभीर, अथक पथिक भी है
जो सत्य की खोज में
एक अदम्य साहस के साथ
अकेले
सूनसान!
ज़िंदगी की ऊबड़-खाबड़ राह पर
अविचलित चल पड़ती है,
तब-तक
जब-तक
कुछ भी अप्राप्य न रहे।
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