ऊर्मि शर्मा - मुंबई (महाराष्ट्र)
इमारतें - कविता - ऊर्मि शर्मा
गुरुवार, अक्टूबर 19, 2023
शहर की ऊँची इमारतें
ख़ून पसीना पिए
खड़ी है
इसी गाँव के ग़रीब
मज़दूर का
पल में घुड़क दिया
फुटपाथ से उसे
उखाड़ आशियाना
चार-हाथ का उसका
चादर की ओट में
वो घर बसाए
सीने में घुटनें समेटे
उसके हिस्से में क्या
फुटपाथ का
कोना भी नहीं
नकल अकल से पहले
अपनी छलनी सी
चादर के पैबंद तो
मज़बूत कर लो
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